Monday, November 3, 2014

दरद न जाने कोए .....

कहते हैं
जिन्नाद ने पकड़ा है उसे
वो चीखती है, चिल्लाती है
अट्टाहास लगाती है
गुर्राती है, मुट्ठियाँ भींचती है
खरोच डालती है पकडनेवाले को
और कभी-कभी,
एकदम गुमसुम सी हो जाती है
जैसे चुप्पी बैठ गयी हो होठो पर
फिर खारा पानी समूचे जिस्म पर छा जाता है
‘बाबा हो बाबा’ की गुहार लगाती है
उसकी चीत्कार से आकाश तक काँप उठता है
कहते है कि
यह जिन्नाद पड़ोस के उसी लडके का है
हाँ, तभी तो एक माह पहले
जब खेत के बीचोबीच
उसकी कटी हुई लाश मिली थी
यह बदहवास सी भागी थी वहाँ
और लौटी तो.......
तो वह थी ही नहीं भई
उसे तो जिन्नाद ने पकड़ लिया था