मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Friday, September 26, 2014

लडकी


लडकी,
बोल मत,
हंस मत,
देख मत,
सुन मत
ढांप खुद को,
खाना बना,
सफाई कर
और इन आवाज़ो से
थोडी सी फुरसत मिलते ही
लडकी
चुपके से
खोल देती है खिडकी
एक टुकडा धूप
और मुट्ठी भर हवा मे
अंगडाई लेकर
ठठाकर  हंस देती है
......स्वयम्बरा