Wednesday, July 30, 2014

मेरे तुम !


तुमने कहा
अकेले हो जाते हो
जब नही होती पास तुम्हारे
फिर तुम कह्ते हो
एकाकार हो मुझसे
आत्मा हूँ तुम्हारी
सुनो तो,
यह कैसी अजब बात है
अकेले होने का अह्सास
और एकत्व
अलग नही एक-दूसरे से?
लेकिन शायद यह ठीक भी है
क्युंकि तुम खुद भी विरुद्धो का सामंजस्य हो
बिल्कुल मेरे आराध्य की तरह
.......स्वयम्बरा
( विरुद्धो का सामंजस्य 'भगवान शंकर' के लिये कहा जाता है)

किस गांव की बात करते हो जी ?



किस गांव की बात करते हो जी ! 
किस्से- कहानी  वाले
मन को बहलानेवाले
सपनो मे आनेवाले

दिखाओ जी दिखाओ,
कहाँ हैं ये गांव ?
किस जगह जमती है चौपाल?
कहा सुने जाते है बिरहा, चैता, फगुआ के तान
किस डाल पर पडता है झुला
कहा गाती है वे बेखौफ, कजरिया
मिहनत और श्रम, भोले से जन
होते है क्या?

ना जी ना
वो गांव एक छलावा था
बस, एक दिखावा था
सच तो यह कि
शहर बनने की होड मे
विद्रुप हो गए गांव
कुरुप हो गए गाव

डर है वहा, खौफ भी वहा
कोलाहल है वहा, नरभक्षी भी वहा
भाग जाना चाहे, जो बसते है वहा

तो दोस्तो, अब का किस्सा यह कि
भारत गांवो का देश नही
लोभ और लालच ने लील लिया उन्हे
अब, लुप्त्प्राय है गाव
और हमने ही 
न्हे संरक्षितघोषित कर दिया है

.......स्वयम्बरा