मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Monday, December 29, 2014

जाड़े की धूप
















(चंद पंक्तिया ) 

कुनमुनाई
अलस सुबह की
ठिठुरी धूप
*****
कुहरा घना
स्तब्ध पवन
सिकुड़ी धूप
*****
सूरज हंसा
अंगडाई लेकर
निखरी धूप
*****
अनमनी सी
खड़ी क्षितिज पर
विरही धूप
............स्वयंबरा 

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