मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Wednesday, July 30, 2014

किस गांव की बात करते हो जी ?



किस गांव की बात करते हो जी ! 
किस्से- कहानी  वाले
मन को बहलानेवाले
सपनो मे आनेवाले

दिखाओ जी दिखाओ,
कहाँ हैं ये गांव ?
किस जगह जमती है चौपाल?
कहा सुने जाते है बिरहा, चैता, फगुआ के तान
किस डाल पर पडता है झुला
कहा गाती है वे बेखौफ, कजरिया
मिहनत और श्रम, भोले से जन
होते है क्या?

ना जी ना
वो गांव एक छलावा था
बस, एक दिखावा था
सच तो यह कि
शहर बनने की होड मे
विद्रुप हो गए गांव
कुरुप हो गए गाव

डर है वहा, खौफ भी वहा
कोलाहल है वहा, नरभक्षी भी वहा
भाग जाना चाहे, जो बसते है वहा

तो दोस्तो, अब का किस्सा यह कि
भारत गांवो का देश नही
लोभ और लालच ने लील लिया उन्हे
अब, लुप्त्प्राय है गाव
और हमने ही 
न्हे संरक्षितघोषित कर दिया है

.......स्वयम्बरा

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2 Comments:

At November 18, 2014 at 12:35 AM , Blogger संजय भास्‍कर said...

Every word is an expression Beautiful composition

 
At November 18, 2014 at 12:47 AM , Blogger स्वयम्बरा said...

आभार ....

 

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