Thursday, September 11, 2008

मीडिया का महाप्रलय

विश्व विज्ञानियों का एक सामूहिक प्रयास ब्रमांड की खोज ने जहाँ पूरे विश्व को लगातार रोमांच से भरा रखा वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पिछले सप्ताह भर से भोली -भाली भारतीय जनता को डराए रखा। इंदौर की एक लड़की ने तो आत्म हत्या कर ली .उन तथाकथित इलेक्ट्रोनिक मीडिया के अनुसार विज्ञानं के उक्त प्रयोग से श्रृष्टि का सर्वनाश हो जाएगा , पर हुआ कुछ नहीं.लेकिन उनकी खबरों ने तो जान तक ले ली। आख़िर कब तक मीडिया का कहर जारी रहेगा? मीडिया के तरफ़ उठी हुई उंगली एक यक्ष प्रश्न है-------.जेनेवा में विज्ञानं का प्रयोग मानव सभ्यता को विकसित करने का एक प्रयास है। प्रयोग के सप्ताह भर पहले से विश्व प्रयोग का लुत्फ़ उठा रहा था ,लेकिन भारतीयमीडिया की खबरों ने जनमानस को लगातार डराए रखा . गांव वाले तो डरकर पूजा पाठकर रहे थे .कुछ लोग अपना सारा काम छोड़ मंगलवार के दिन सपरिवार ईश्वर से लगातार प्रार्थना करते नज़र आए .सबके जेहन में मात्र एक ही बात थी कि वे लोगअब जिन्दा नहीं रहेंगे .इंडिया टीवी ,आईबीएन ७ जैसे न्यूज़ चॅनल ने तो जनता की साँस सांसत मेंडाले रखी। आम जनता की ओर से इन टीवी वालों को आगाह करना चाहूगी की अब तुम ऐसी खबरों को परोसने से बाज़ आ जाओ ,अन्यथा बहुत ही पछताना पड़ेगा-----। swayambara